Friday, April 10, 2009

कश्मीर पाकिस्तान का मर्ज नहीं, उसका लक्षण भर है… तो आखिर असली बीमारी क्या है?

पश्चिम में कुछ लोगों को लगता है कि पाकिस्तान की समस्या कश्मीर है, और अगर कश्मीर हल हो जाये तो पाकिस्तान कि सारी मुसीबतें मिट जायेंगीं. वहां अचानक शांति कि आमद हो जायेगी, और फटाफत सारे आतंकवादी हथियार रख के हल-हंसिया थाम लेंगे.

पश्चिम सारे विश्व को अपने अमेरिकी चश्मे से देख रहे हैं बिना समझे की जिस तरह आतंकवादी सोचता है, उस तरह से एक सामान्य नागरिक नहीं सोच सकता.

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खेल भी तो किस चीज से?…

इसलिए वो आशा करते हैं कि पाकिस्तान के जनमानस में स्वात में लड़की की पिटाई के लिये स्वत: स्फुट सहानुभूती के ऐसे स्वर उठेंगे की तालिबान भी बह जायेगा. शायद उनके दिमाग में यह विचार भी नहीं आया होगा कि बहुत सारे पाकिस्तानियों के लिये यह शर्म नहीं गर्व की अनुभूति लेकर आयी घटना है. गर्व अपनी शरिया और शूरा के अक्षरश: पालन करवा पाने का.

लेकिन अमेरिकि लिबरलों के लिये यह समझ पाना मुश्किल है, इसलिये जब अमेरिकि दूत हिलब्रूक ने कहा कि वो भारत पर कश्मीर की समस्या के बारे में बात करने के लिये जोर नहीं डालेंगे तो अमेरिका में ही इसके विरोध के स्वर गूंजने लगे. अचानक आवाजें आने लगीं कि अगर कश्मीर पाकिस्तान की शांति का रास्ता है.

उन्हें लगता है कि कश्मीर न पाने की बेबसी और बांग्लादेश के कट जाने का दर्द पाकिस्तानी जनमानस को खाये जा रहा है, और यही कारण है पाकिस्तानी युवाओं का आतंकवाद की तरफ जाने का. उन्हें लगता है कि कश्मीर हल हो जाये तो यह बिगड़ैल लड़के घर लौट जायेंगे और धीरे-धीरे आयेगी… शांति...

काश अगर ऐसा होता तो कश्मीर देकर भी देख लेते. आखिर विश्व शांति से बड़ा क्या होगा यह अत्यंत महंगा जमीन का टुकड़ा जो हर साल भारत के कई सौ करोड़ खा रहा है.

काश ऐसा होता…

असल में पाकिस्तान की समस्या कश्मीर या बांग्लादेश भी नहीँ. पाकिस्तान की समस्या है सांप्रादायिकता. वहां पर रहने वाले लोगों में इस्लामिक साम्प्रादायिकता इस हद तक है कि उन्हें इस्लामिक धर्म, इस्लामिक विचार, इस्लामिक जीवनशैली (जो शरिया के अनुसार है) के अलावा कुछ स्वीकार्य ही नहीं.

हर वाक्य में इंशा-अल्लाह कहकर अल्लाह का अपमान करने वाले कठमुल्लों को जाने क्यों भरोसा है कि जिसे इस्लाम पर भरोसा नहीं, उस पर अल्लाह का करम नहीं. उनका निर्णय एक ही है, उनका लक्ष्य एक ही है. सारे विश्व में एकक्षत्र उनका मनमाना फतवेगिरी का कानून, कश्मीर का एजेंडा वक्ती है. सिर्फ इसलिये ताकी जिन लोगों कि भावनायें धर्म नहीं भड़का पाता, उन्हें राष्ट्र के नाम पर भड़का दिया जाये.

थोड़ा सोचकर देखें की पाकिस्तान के हाथ कश्मीर लग जाये तो क्या होगा.

बताईये

1 क्या पाकिस्तान की औकात है कि कश्मीरियों को जिस सुविधाओं की आदत है वह उसके लिये खर्च कर पाये?

2 जो आतंकवादी पाकिस्तान ने पाल पोस कर बड़े किये हैं, वो बेरोजगारी में क्या करेंगे?

3 पाकिस्तान के जिस तबके को उसने इतने दिन भारत के खिलाफ नफरत का जहर पिला-पिला कर पैदा किया, वो कश्मीर के बाद क्या मांगेगा?

पाकिस्तान में मशहूर जोकर है जिसका नाम है जायद हमदी. इसने पहले ब्रासटेक्स नाम के प्रोग्राम में मुंबई विस्फोट के बाद उल्टे सीधे बयान दिये थे. इसने थोड़े दिन पहले भारत के भरत वर्मा से कहा कि ‘फिर हम पानीपत में मिलेंगे’

जायद हमदी इतिहास में इतना पीछे चला गया, लेकिन हालिया इतिहास भूल गया. भारत से युद्धों में करारी हार और भारतियों की दया पर छूटने वाले करगिल के घुसपैठियों का सबक यह भूल गया.

अब भी नये घुसपैठिये आ चुके हैं और हमारे सैनिक सीमाओं पर लड़ रहे हैं. पूरे गांव के गांव कश्मीर में खाली करा दिये गये हैं. चुनाव का मौसम है, इसलिए आप इस बारे में कम सुन रहे हैं. लेकिन हालात गंभीर हैं.

पाकिस्तान की दुश्मनी कश्मीर के लिये नहीं. पाकिस्तान की दुश्मनी देश या राष्ट्र के लिये नहीं. पाकिस्तान की दुश्मनी इससे भी गहरी है. पाकिस्तान की दुश्मनी धर्मांध है, उनकी दुश्मनी उनके विधर्मियों के साथ है जिनका यह वजूद मिटा देना चाहते हैं. इसलिये पाकिस्तान का दुश्मन हर वो देश है जहां उसके धर्म से इतर लोगों का शासन है, और इसलिये वह हर उस देश में आतंकवाद का निर्यात कर रहा है.

जब तक आप यह स्वीकार नहीं करते, तब तक आप पाकिस्तान के आतंकवाद का न कारण समझेंगे, न उसके निवारण का रास्ता ढूंढ़ पायेंगे.


जाते-जाते:

दिग्विजय सिंह (वहीं जिन्होंने 10 साल तक म.प्र. का ऐसा विकास किया कि जहां बिजली-पानी आता भी था, बंद हो गया) ने कहा कि स्विस असोशियेशन और आडवाणी, दोनों के द्वारा बताये गयीं भारतियों कि स्विस बैंकों में जमा राशी गलत हैं.

सही है, दिग्विजय के सोर्स ज्यादा भरोसेमंद हैं, उन्हें जरूर पता है कि कितना-कितना पैसा जमा है… आखिर पैसा भी तो पिछले 60 सालों में उन्हीं….

4 comments:

  1. रवि सिंहApril 10, 2009 at 10:10 PM

    पाकिस्तान का कुछ हिस्सों में बंटना ही समस्या का सही हल है, स्वात घाटी का तालिबान के हाथों में जाना इसके बंटने की शुरूआत है, आगे कुछ और हिस्से इसी तरह स्वायत्तशासी होंगे

    बंटे हुआ पाकिस्तान से दुनियां के ऊपर मंडराता खतरा नहीं रहेगा, वहां पर जो उदारवादी रहते हैं उन्हें तो तकलीफ नहीं होगी

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  2. सबसे बड़ा खतरा पाकी परमाणू बम है.

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  3. समस्या कश्मीर नहीं हिन्दुस्तान का विभाजन है जिसके कारण भारत में सम्प्रदायिक तनाव का जन्म हुआ। समस्या शायद उस समय हल होगी जब यह निर्णय को उलट दिया जाएगा!!!!!!

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